Gulistaan Sahitya Ki Phulwari

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Gulistaan Sahitya Ki Phulwari
by D K Nivatiya


साहित्य समाज का दर्पण माना जाता है। साहित्य की मूल चेतना और भावना अथवा आधार मानव और समाज की उन्नति है। साहित्य शब्द से अनेक रूप और विधाओं का ज्ञान होता है। साहित्य की रचना समाज से होती है। व्यक्ति के ह्रदय में भावनाओं की लहरें होती है जिनसे वह राग,प्रेम,अपनत्व,कर्तव्य के बंधनों से बंध जाता है। इस पक्ष से ही वह अभिव्यक्ति की और बढ़कर कविता,कहानी,नाटक,उपन्यास,एकांकी,लेख,आलोचना व् अन्य रूपो में सृजन करता है और कला के विभिन्न रूपो को सँवारता है। जो साहित्य के ही विविध रूप है

ISBN: 978-81-938020-3-8
Pages: 79, 6x9, Hindi
Available Types: Print
Genre: Poetry
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